महादेव / शब्दकोश

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शिव के मंदिरों, ग्रंथों और कथाओं में मिलने वाले 139 शब्द।

ॐ

ॐ
पवित्र अक्षर, परम सत्य की ध्वनि; कहा जाता है कि ओंकारेश्वर का द्वीप इसी आकार का है। पवित्र ग्रंथ और स्तोत्र →

अ

अक्षमाला
मनकों की माला, प्रायः रुद्राक्ष की, जिसे शिव कई प्रतिमाओं में धारण करते हैं; जप में मंत्र गिनने के काम आती है। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →
अघोर
“जो घोर नहीं।” शिव के पाँच मुखों में से दक्षिणमुखी मुख, संहार और उग्र कृपा का मुख; एक मंत्र का नाम भी। स्वरूप और अवतार →
अघोरी
एक उग्र शैव पंथ के साधु, जो श्मशानों के पास रहते हैं और शुद्धि-अशुद्धि के भेद को नकारते हुए हर वस्तु में शिव को देखना चाहते हैं। शैव परंपराएँ और संत →
अन्धक
अंधा असुर, जो पार्वती के शिव की आँखें ढँकने पर शिव के पसीने से जन्मा। त्रिशूल पर टाँगे जाने पर उसने पश्चाताप किया और भक्त बन गया। महाकथाएँ →
अपस्मार
अज्ञान और विस्मृति का बौना, जो नटराज के दाएँ पैर के नीचे दबा है। उसे कभी मारा नहीं जाता, क्योंकि ज्ञान को अज्ञान पर बार-बार विजय पानी होती है। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →
अभिनवगुप्त
कश्मीरी दार्शनिक और कवि (लगभग 950–1020 ई.), काश्मीर शैव दर्शन के सबसे महान आचार्य; उनका तन्त्रालोक अद्वैत त्रिक दर्शन को प्रस्तुत करता है। शैव परंपराएँ और संत →
अभिषेक
मंत्रों के साथ लिंग या प्रतिमा का जल, दूध, दही, शहद, घी और अन्य सामग्री से विधिपूर्वक स्नान। शिव-पूजा का सबसे प्रचलित कर्म। शैव परंपराएँ और संत →
अमरनाथ
कश्मीर का ऊँचा गुफा-धाम, जिसमें बर्फ़ का प्राकृतिक लिंग बनता है; यात्रा श्रावण पूर्णिमा पर पूरी होती है। पावन भूगोल →
अरुणाचल
तमिलनाडु के तिरुवण्णामलै की पवित्र पहाड़ी, जिसे अग्नि-रूप शिव के रूप में पूजा जाता है; अरुणाचलेश्वर मंदिर और कार्तिगै दीपम् का स्थान। पावन भूगोल →
अर्धनारीश्वर
“वे प्रभु जो आधे नारी हैं।” एक ही देह में शिव और पार्वती, दायाँ आधा पुरुष, बायाँ आधा स्त्री, जो दिखाता है कि शिव और शक्ति अभिन्न हैं। स्वरूप और अवतार →
अविमुक्त
“कभी न छोड़ा गया।” काशी और उसके पावन क्षेत्र का नाम, जिसे कहा जाता है कि शिव और पार्वती कभी नहीं छोड़ते। पावन भूगोल →

आ

आगम
वे शास्त्र जो मंदिर-निर्माण, मूर्ति-निर्माण, अनुष्ठान और पूजा का विधान करते हैं। शैव आगम, जो परंपरा से 28 माने जाते हैं, शैव सिद्धान्त की साधना का आधार हैं। पवित्र ग्रंथ और स्तोत्र →
आत्मलिंग
शिव के अपने स्वरूप का लिंग, जो रावण को दिया गया और जिसे गणेश ने गोकर्ण में रख दिया, जहाँ इसकी पूजा महाबलेश्वर के रूप में होती है। महाकथाएँ →
आदि कैलाश
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में तिब्बत सीमा के पास की चोटी; पंच कैलाश में से एक, जिसके चरणों में पार्वती कुंड और पास ही ॐ पर्वत है। पावन भूगोल →
आदि शंकराचार्य
अद्वैत वेदांत के आचार्य, जिन्हें परंपरा 8वीं सदी ई. का मानती है; शिव के कई स्तोत्र उनके रचे बताए जाते हैं, और परंपरा के अनुसार उन्होंने केदारनाथ के पास देह त्यागी। शैव परंपराएँ और संत →
आदियोगी
“पहले योगी।” योग के मूल गुरु के रूप में शिव, जिन्होंने यह ज्ञान सप्तर्षियों को दिया। स्वरूप और अवतार →
आनन्द ताण्डव
चिदम्बरम् में नटराज का आनंद-नृत्य, जिसके द्वारा शिव संसार की सृष्टि, पालन, संहार, तिरोभाव और अनुग्रह करते हैं। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →
आरुद्रा दर्शन
मार्गऴि मास में तिरुवादिरै नक्षत्र पर मनाया जाने वाला तमिल उत्सव, जो नटराज के ब्रह्मांडीय नृत्य का उत्सव है, विशेषकर चिदम्बरम् में। पर्व, व्रत और उपासना →
आशुतोष
“जो झट प्रसन्न हों।” शिव का एक नाम, जो सच्चे भक्तों को सहज ही वर दे देते हैं, कभी-कभी देवताओं की चिंता के बावजूद। स्वरूप और अवतार →

उ

उपमन्यु
वे बाल-ऋषि जिनकी भक्ति ने शिव से दूध का सागर पाया; महाभारत में आगे चलकर उन्होंने कृष्ण को शिव-उपासना सिखाई। महाकथाएँ →
उमा
पार्वती का एक प्राचीन नाम, जो केन उपनिषद् में ही एक ज्ञानमयी देवी के रूप में मिलता है। शिव परिवार और गण →

ए

एकादश रुद्र
ग्यारह रुद्र, वेदों के तूफ़ान-देवता और बाद में शिव के रूप; इनकी पूजा से एकादश रुद्राभिषेक बना। उद्गम: रुद्र से शिव तक →

क

कण्णप्प
श्रीकालहस्ती के शिकारी संत, जिन्होंने रक्त बहाते लिंग को अपनी आँखें अर्पित कीं; 63 नायनारों में से एक। महाकथाएँ →
कपाल
खोपड़ी का पात्र, जिसे भिक्षाटन और भैरव रूप में शिव धारण करते हैं, ब्रह्मा के कटे सिर की याद में। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →
कपालमोचन
“कपाल से मुक्ति।” काशी का पवित्र सरोवर जहाँ ब्रह्मा का कपाल भैरव के हाथ से गिरा। पावन भूगोल →
काँवड़ यात्रा
श्रावण की पदयात्रा, जिसमें भक्त डंडे से लटके घड़ों में गंगाजल लेकर शिवलिंग पर चढ़ाने जाते हैं। पर्व, व्रत और उपासना →
कापालिक
आरंभिक मध्यकाल के शैव साधु, जो कपाल-पात्र रखते थे और भैरव के प्रायश्चित का अनुकरण करते थे; यह पंथ बहुत पहले लुप्त हो चुका है। शैव परंपराएँ और संत →
कामदेव
प्रेम के देवता, जिन्हें शिव का ध्यान भंग करने पर शिव के तीसरे नेत्र ने भस्म कर दिया। महाकथाएँ →
कार्तिकेय
शिव के षण्मुख पुत्र, जिन्हें कृत्तिकाओं ने पाला और जिन्होंने तारक का वध किया; स्कन्द और तमिल में मुरुगन कहलाते हैं। शिव परिवार और गण →
काल भैरव
काल के स्वामी और काशी के रक्षक, यानी कोतवाल, के रूप में भैरव, जिनका वाहन श्वान है। स्वरूप और अवतार →
काशी
वाराणसी, शिव की नगरी, जहाँ मृत्यु से मोक्ष मिलना माना जाता है। पावन भूगोल →
काश्मीर शैव दर्शन
कश्मीर का अद्वैत शैव दर्शन, जिसे त्रिक भी कहते हैं, जो सिखाता है कि संसार शिव की अपनी स्वतंत्र आत्म-अभिव्यक्ति है। शैव परंपराएँ और संत →
किरात
पहाड़ी शिकारी। पाशुपतास्त्र देने से पहले अर्जुन की परीक्षा लेने के लिए शिव ने यही रूप धरा। महाकथाएँ →
कीर्तिमुख
“यश का मुख।” मंदिर-द्वारों के ऊपर उकेरा उग्र मुख, जिसे शिव द्वारा रचा वह प्राणी बताया जाता है जिसने स्वयं को ही खा लिया। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →
कुमारसम्भव
कालिदास का संस्कृत काव्य, लगभग 4थी–5वीं सदी ई., पार्वती के तप, शिव से उनके विवाह और कुमार के आगमन पर। पवित्र ग्रंथ और स्तोत्र →
कृत्तिवास
“चर्म जिनका वस्त्र है।” काशी में मारे गए गज-असुर की खाल ओढ़े शिव। स्वरूप और अवतार →
केदारनाथ
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में हिमालयी ज्योतिर्लिंग, और पंच केदार में पहला। पावन भूगोल →
कैलाश
पश्चिमी तिब्बत का पर्वत, लगभग 6,638 मी., शिव और पार्वती का घर; बौद्धों, जैनों और बोन अनुयायियों के लिए भी पवित्र। पावन भूगोल →

ख

खट्वांग
खोपड़ी से सजा दंड, जिसे शिव अपने उग्र रूपों में और कापालिक साधु धारण करते हैं। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →

ग

गंगा
पवित्र नदी-देवी, जिन्हें स्वर्ग से उतरते समय शिव ने अपनी जटाओं में थाम लिया ताकि उनके वेग से धरती न फटे। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →
गंगाधर
“गंगा को धारण करने वाले।” उतरती नदी को अपनी जटा में थामते शिव। स्वरूप और अवतार →
गजासुर
हाथी रूप वाला असुर, जिसे शिव ने काशी में मारा। शिव ने उसकी खाल ओढ़ी और कृत्तिवास कहलाए। महाकथाएँ →
गण
शिव के अनुचरों का समूह: बौने, जंगली और आनंदमग्न प्राणी, जिनके नायक गणेश और नन्दी हैं। शिव परिवार और गण →
गणेश
पार्वती और शिव के गजमुख पुत्र, विघ्नहर्ता, जिनकी पूजा हर अनुष्ठान से पहले होती है। शिव परिवार और गण →
गोकर्ण
कर्नाटक का तटीय मंदिर-नगर जहाँ आत्मलिंग की पूजा महाबलेश्वर के रूप में होती है; इसके नाम का अर्थ है “गाय का कान”। पावन भूगोल →
गौरी
“गोरी।” अपने सौम्य, स्वर्णिम रूप में पार्वती; सुखी दांपत्य के लिए स्त्रियाँ इनकी पूजा करती हैं। शिव परिवार और गण →

च

चण्डेश
चण्डिकेश्वर, वे नायनार संत जो शिव की संपत्ति के भंडारी बने। दक्षिण भारतीय मंदिरों में उनका मंदिर गर्भगृह की जल-निकासी के पास होता है। शैव परंपराएँ और संत →
चन्द्रशेखर
“चन्द्रमा को मुकुट बनाए।” सिर पर अर्धचन्द्र धारण किए शिव, वह सौम्य रूप जिसमें वे अपने विवाह पर प्रकट हुए। स्वरूप और अवतार →
चिदम्बरम्
तमिलनाडु का मंदिर-नगर जहाँ शिव नटराज के रूप में नृत्य करते हैं; आकाश तत्व का पंचभूत स्थल। पावन भूगोल →

ज

जटा
शिव की ऊँची बँधी उलझी लटें, जिनमें गंगा, अर्धचन्द्र और प्रायः एक सर्प रहते हैं। कल्पेश्वर में जटा की पूजा होती है। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →
जलन्धर
समुद्र में डाले गए शिव के क्रोध से जन्मा असुर, जो तब तक अजेय रहा जब तक उसकी पत्नी वृन्दा का व्रत बना रहा। शिव ने उसका वध किया। महाकथाएँ →
जलाधारी
लिंग के चारों ओर टोंटीदार आधार, जो अभिषेक का जल बाहर ले जाता है। भक्त इसकी निकासी को लाँघते नहीं। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →
ज्योतिर्लिंग
उन बारह धामों में से एक जहाँ माना जाता है कि शिव प्रकाश-स्तंभ के रूप में प्रकट हुए; केदारनाथ इनमें से एक है। पावन भूगोल →

ड

डमरू
शिव के हाथ का छोटा, रेतघड़ी के आकार का ढोल। इसकी थाप सृष्टि की लय है; परंपरा मानती है कि संस्कृत व्याकरण की ध्वनियाँ इसी से निकलीं। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →

त

तपस्
“ताप।” आध्यात्मिक शक्ति जगाने वाली कठोर साधना और तपस्या; शिव महान तपस्वी हैं और पार्वती ने तप से ही उन्हें पाया। शैव परंपराएँ और संत →
ताण्डव
शिव का प्रचंड ब्रह्मांडीय नृत्य, कभी आनंद का, कभी संहार का। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →
तेवारम्
संत अप्पर, सम्बन्दर और सुन्दरर के तमिल भजन, जो शिव मंदिरों में गाए जाते हैं और 276 धामों की महिमा गाते हैं। पवित्र ग्रंथ और स्तोत्र →
त्रिनेत्र
माथे के बीच शिव का तीसरा नेत्र, ज्ञान का नेत्र, जिसकी अग्नि ने कामदेव को भस्म किया। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →
त्रिपुण्ड्र
माथे पर पवित्र भस्म की तीन आड़ी रेखाएँ, जो शैव भक्त लगाते हैं। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →
त्रिपुरान्तक
असुरों के तीन उड़ते नगरों को एक ही बाण से नष्ट करने वाले शिव। स्वरूप और अवतार →
त्रिपुरारी पूर्णिमा
कार्तिक पूर्णिमा, जो त्रिपुर पर शिव की विजय की याद में मनाई जाती है; वाराणसी में दीपों के साथ देव दीपावली के रूप में। पर्व, व्रत और उपासना →
त्रियुगीनारायण
सोनप्रयाग के पास का गाँव-मंदिर, जहाँ गढ़वाली परंपरा के अनुसार शिव और पार्वती का विवाह एक सदा जलती अग्नि के सामने हुआ। पावन भूगोल →
त्रिशूल
शिव का त्रिशूल, जिसके तीन शूलों को तीन गुण, तीन काल, या सृष्टि, पालन और संहार के रूप में पढ़ा जाता है। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →

द

दक्ष
प्रजापति, सती के पिता, जिन्होंने अपने यज्ञ में शिव का अपमान किया। उन्होंने चन्द्रमा को क्षीण होने का शाप भी दिया। महाकथाएँ →
दक्षिणामूर्ति
वटवृक्ष के नीचे बैठे दक्षिणमुखी गुरु के रूप में शिव, जो मौन से ऋषियों को उपदेश देते हैं। स्वरूप और अवतार →
दर्शन
देवता को देखना और उनके द्वारा देखा जाना। मंदिर-दर्शन या तीर्थयात्रा का केंद्रीय क्षण। शैव परंपराएँ और संत →
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्
बारह ज्योतिर्लिंगों को उनके प्रदेश के नाम से गिनाने वाला छोटा संस्कृत स्तोत्र, जिसका पाठ बहुत से भक्त सुबह-शाम करते हैं। पवित्र ग्रंथ और स्तोत्र →

ध

ध्यान
मन को एकाग्र करने की साधना; किसी देवता के रूप का वर्णन करने वाला श्लोक भी, जिसे पूजा से पहले मन में छवि स्थिर करने के लिए पढ़ा जाता है। शैव परंपराएँ और संत →

न

नटराज
“नर्तकों के राजा।” अग्नि-वलय में नृत्य करते शिव, चिदम्बरम् के ब्रह्मांडीय नर्तक। स्वरूप और अवतार →
नन्दी
शिव के वृषभ, वाहन और द्वारपाल। उनकी प्रतिमा गर्भगृह की ओर मुख किए, लिंग को निहारती बैठी होती है। शिव परिवार और गण →
नायनार
63 तमिल शैव संत, लगभग 6ठी–9वीं सदी, जिनके जीवन-चरित पेरिय पुराणम् में कहे गए हैं। शैव परंपराएँ और संत →
निर्वाण षट्कम्
आदि शंकराचार्य का रचा बताया जाने वाला छह श्लोकों का स्तोत्र, जिसका हर श्लोक “शिवोऽहम्, शिवोऽहम्”, मैं शिव हूँ, पर समाप्त होता है। पवित्र ग्रंथ और स्तोत्र →
नीलकण्ठ
“नीले कंठ वाले।” समुद्र-मंथन से निकला हलाहल विष पीकर उसे कंठ में रोके हुए शिव। स्वरूप और अवतार →

प

पंच केदार
गढ़वाल के पाँच मंदिर जहाँ बैल रूप शिव के अंग प्रकट हुए: केदारनाथ, मध्यमहेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ और कल्पेश्वर। पावन भूगोल →
पंच कैलाश
शिव के निवास माने जाने वाले हिमालय के पाँच शिखर: कैलाश, आदि कैलाश, किन्नौर कैलाश, श्रीखंड महादेव और मणिमहेश। पावन भूगोल →
पंचभूत स्थल
दक्षिण भारत के पाँच शिव मंदिर, जिनमें से हर एक एक तत्व का रूप है: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश। पावन भूगोल →
पंचाक्षर
पाँच अक्षरों का मंत्र “न-मः शि-वा-य”, शिव-उपासना का हृदय। पवित्र ग्रंथ और स्तोत्र →
पंचानन
पाँच मुखों वाले शिव: सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष और ईशान। स्वरूप और अवतार →
परिक्रमा
किसी मंदिर या पावन स्थान के चारों ओर दक्षिणावर्त चलना। शिवलिंग की परिक्रमा प्रायः आधी होती है, जो जलाधारी पर लौट आती है। शैव परंपराएँ और संत →
पशुपति
“प्राणियों के स्वामी।” रुद्र का एक प्राचीन विशेषण, सभी बँधे हुए जीवों (पशु) के स्वामी। उद्गम: रुद्र से शिव तक →
पशुपतिनाथ
नेपाल के काठमांडू में बागमती नदी के तट पर स्थित महान शिव मंदिर। पावन भूगोल →
पार्वती
पर्वत की पुत्री, पुनर्जन्मी सती, शिव की पत्नी और गणेश तथा कार्तिकेय की माता। शिव परिवार और गण →
पाशुपत
सबसे पुराना ज्ञात शैव साधु-पंथ, जो लकुलीश से जुड़ा है, और जिसके सदस्य शिव का अनुकरण करके मुक्ति खोजते थे। शैव परंपराएँ और संत →
पाशुपतास्त्र
शिव का अमोघ अस्त्र, जो किरात से हुए द्वंद्व के बाद अर्जुन को दिया गया। महाकथाएँ →
पेरिय पुराणम्
सेक्किऴार की 12वीं सदी की तमिल रचना, जो 63 नायनार संतों के जीवन-चरित कहती है। पवित्र ग्रंथ और स्तोत्र →
प्रदोष
हर पखवाड़े की त्रयोदशी तिथि की संध्या, जो शिव को प्रिय है; प्रदोष व्रत संध्या-पूजा के साथ रखा जाता है। पर्व, व्रत और उपासना →
प्रसाद
देवता द्वारा आशीर्वादित भोग या अन्य चढ़ावा, जो कृपा के रूप में भक्तों में बाँटा जाता है। शैव परंपराएँ और संत →

ब

बसव
12वीं सदी के कन्नड़ कवि, मंत्री और सुधारक, जिन्होंने जाति और मंदिर-कर्मकांड को नकारकर निजी भक्ति पर बल देते हुए लिंगायत आंदोलन को आकार दिया। शैव परंपराएँ और संत →
बिल्व
बेल का पेड़, Aegle marmelos। इसका तीन पत्तियों वाला बेलपत्र शिव को सबसे प्रिय चढ़ावा है, जिसे उनकी तीन आँखों या त्रिशूल का प्रतीक बताया जाता है। शैव परंपराएँ और संत →
बोल बम
काँवड़ियों का जयघोष, जब वे शिव पर चढ़ाने के लिए गंगाजल ले जाते हैं, विशेषकर श्रावण में देवघर के मार्ग पर। पर्व, व्रत और उपासना →

भ

भस्म
पवित्र राख, विशेषकर गोबर के उपलों की आग या श्मशान से ली गई, जिसे नश्वरता के चिह्न के रूप में शिव और उनके भक्त लगाते हैं। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →
भस्मासुर
वह असुर जिसे वर मिला कि वह जिसके सिर को छुए, वह जल जाए। मोहिनी बने विष्णु ने छल से उससे अपना ही सिर छुआ दिया। महाकथाएँ →
भिक्षाटन
नग्न भटकते भिक्षुक के रूप में शिव, जो ब्रह्मा के कपाल को भिक्षापात्र बनाए हैं; दक्षिण भारतीय कांस्य-प्रतिमाओं का बहुत प्रिय रूप। स्वरूप और अवतार →
भृंगी
वे ऋषि जो पार्वती की उपेक्षा कर केवल शिव को पूजते थे। कंकाल बना दिए गए और तीसरा पैर पाया; उनकी कथा अर्धनारीश्वर का अर्थ बताती है। महाकथाएँ →
भैरव
शिव के क्रोध से जन्मा उनका उग्र रूप, जिसने ब्रह्मा का पाँचवाँ सिर काटा। नगरों और शक्तिपीठों के रक्षक। स्वरूप और अवतार →

म

मणिकर्णिका
वाराणसी का महान श्मशान घाट, जिसका नाम उस कर्णफूल पर पड़ा जो कहा जाता है कि इसके कुएँ में गिरा था। पावन भूगोल →
महाकाल
“महान काल।” काल के संहारक के रूप में शिव; उज्जैन में पूजित, और बौद्ध धर्म में रक्षक देवता के रूप में। स्वरूप और अवतार →
महादेव
“महान देवता।” पूरे भारत में शिव का सबसे प्रचलित नाम। स्वरूप और अवतार →
महामृत्युंजय
ऋग्वेद का मंत्र 7.59.12, “त्र्यम्बकं यजामहे…”, जिससे शिव से मृत्यु से मुक्ति और आरोग्य की प्रार्थना की जाती है। पवित्र ग्रंथ और स्तोत्र →
महाशिवरात्रि
फाल्गुन (फ़रवरी–मार्च) में शिव की महान रात्रि, जो उपवास, रात्रि-जागरण और चार प्रहर की पूजा के साथ मनाई जाती है। पर्व, व्रत और उपासना →
मानसरोवर
कैलाश पर्वत के नीचे मीठे पानी की झील, जो कहा जाता है कि ब्रह्मा के मन से जन्मी; इसमें स्नान बहुत से तीर्थयात्रियों की जीवन भर की इच्छा है। पावन भूगोल →
मार्कण्डेय
वे बाल-ऋषि जो यम के आने पर लिंग से लिपट गए; शिव ने यम को लात मारकर हटाया और उन्हें सदा सोलह वर्ष का बना दिया। महाकथाएँ →
मुद्रा
प्रतिमाओं और अनुष्ठान में हाथ का प्रतीकात्मक संकेत, जैसे अभय (डरो मत) और वरद (वर देना)। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →

य

योनि पीठ
वह आधार जिस पर लिंग स्थापित होता है, जो शक्ति का प्रतीक है; दोनों मिलकर शिव और शक्ति का मिलन दिखाते हैं। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →

र

रुद्र
ऋग्वेद के उग्र “गर्जन करने वाले”, तूफ़ान और आरोग्य के देवता, जिनसे आगे चलकर शिव का स्वरूप विकसित हुआ। उद्गम: रुद्र से शिव तक →
रुद्रम्
तैत्तिरीय संहिता (4.5 और 4.7) का रुद्र को समर्पित वैदिक स्तोत्र, जिसके दो भाग हैं, नमकम् और चमकम्; इसे शतरुद्रीय भी कहते हैं। पवित्र ग्रंथ और स्तोत्र →
रुद्राक्ष
“रुद्र की आँख।” Elaeocarpus वृक्ष का बीज, जिसे मालाओं में पहना जाता है और जो कहा जाता है कि शिव के आँसुओं से बना। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →
रुद्राभिषेक
रुद्रम् के पाठ के साथ लिंग का अभिषेक; केदारनाथ और अनेक शिव मंदिरों का केंद्रीय अनुष्ठान। शैव परंपराएँ और संत →

ल

लकुलीश
आचार्य, संभवतः दूसरी सदी ई. के, जिन्हें पाशुपत पंथ का संस्थापक या सुधारक माना जाता है; हाथ में लगुड़ (गदा) लिए दिखाए जाते हैं। शैव परंपराएँ और संत →
लिंग
“चिह्न” या “निशान।” वह गोलाकार स्तंभ जो रूप से परे शिव का प्रतीक है; उनके मंदिरों में पूजा का मुख्य विग्रह। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →
लिंग पुराण
लिंग, उसके उद्भव और पूजा, तथा शिव की सृष्टि-विद्या को समर्पित पुराण। पवित्र ग्रंथ और स्तोत्र →
लिंगायत
कर्नाटक का शैव समुदाय, जिसे वीरशैव भी कहते हैं, जिसके सदस्य शरीर पर छोटा लिंग धारण करते हैं; बसव ने इसे आकार दिया। शैव परंपराएँ और संत →
लिंगोद्भव
उस अग्नि-स्तंभ से प्रकट होते शिव जिसके छोर ब्रह्मा और विष्णु न खोज सके; कई तमिल मंदिरों की पश्चिमी दीवार पर उकेरा जाता है। स्वरूप और अवतार →

व

वचन
बसव और अक्क महादेवी जैसे लिंगायत संतों की छोटी कन्नड़ गद्य-कविताएँ, जो सीधे शिव को संबोधित हैं। पवित्र ग्रंथ और स्तोत्र →
वासुकि
नागों के राजा, जो शिव के गले में लिपटे हैं; समुद्र-मंथन में वे रस्सी बने। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →
विभूति
पवित्र भस्म, जो प्रसाद के रूप में दी जाती है और माथे पर लगाई जाती है; इस शब्द का अर्थ दिव्य महिमा भी है। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →
विश्वनाथ
“विश्व के स्वामी।” काशी के शिव, जिनकी पूजा वाराणसी के ज्योतिर्लिंग मंदिर में होती है। पावन भूगोल →
वीरभद्र
सती की मृत्यु के बाद दक्ष का यज्ञ नष्ट करने के लिए शिव की जटा से जन्मे उग्र योद्धा। स्वरूप और अवतार →
वृन्दा
जलन्धर की पतिव्रता पत्नी; परंपरा मानती है कि उन्हीं से तुलसी का पौधा उगा। महाकथाएँ →

श

शंकर
“कल्याण करने वाले।” शिव का एक नाम; दार्शनिक आदि शंकराचार्य का नाम भी। स्वरूप और अवतार →
शक्ति
दिव्य शक्ति और ऊर्जा, जो देवी के रूप में साकार होती है; शिव की अभिन्न संगिनी। शिव परिवार और गण →
शक्तिपीठ
देवी का पीठ जहाँ कहा जाता है कि सती के शरीर का कोई अंग गिरा; हर पीठ की रक्षा एक भैरव करते हैं। प्रायः 51 गिने जाते हैं। पावन भूगोल →
शिव ताण्डव स्तोत्रम्
शिव के नृत्य का वर्णन करने वाला लयबद्ध संस्कृत स्तोत्र, जिसे परंपरा रावण की रचना मानती है। पवित्र ग्रंथ और स्तोत्र →
शिव पुराण
शिव को समर्पित प्रमुख पुराण, जो संहिताओं में बँटा है; उनकी कथाओं, रूपों और पूजा का मुख्य स्रोत। पवित्र ग्रंथ और स्तोत्र →
शिव सूत्र
काश्मीर शैव दर्शन के सतहत्तर सूत्र, जो कहा जाता है कि 9वीं सदी में वसुगुप्त पर प्रकट हुए। पवित्र ग्रंथ और स्तोत्र →
शिवरात्रि
हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आने वाली शिव की रात्रि; इनमें सबसे बड़ी महाशिवरात्रि है। पर्व, व्रत और उपासना →
शैव सिद्धान्त
आगमों और तमिल भजनों में जड़ें रखने वाला शैव धर्म का प्रमुख संप्रदाय, जो दक्षिण भारत की मंदिर-पूजा में प्रधान है। शैव परंपराएँ और संत →
श्रावण
वर्षा ऋतु का महीना (जुलाई–अगस्त) जो शिव को प्रिय है; काँवड़ यात्रा और श्रावण सोमवार व्रतों का समय। पर्व, व्रत और उपासना →
श्वेताश्वतर उपनिषद्
उत्तर वैदिक उपनिषद्, जिसे विद्वान ईसवी सन् से पहले का मानते हैं, जो पहली बार रुद्र-शिव को परमेश्वर के रूप में प्रस्तुत करता है। पवित्र ग्रंथ और स्तोत्र →

स

सती
दक्ष की पुत्री और शिव की पहली पत्नी, जिन्होंने अपने पिता के यज्ञ में प्राण त्यागे; पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया। शिव परिवार और गण →
सदाशिव
“सदा कल्याणकारी शिव।” शैव सिद्धान्त में पाँच मुखों वाला परम रूप, जो देवता के अन्य सभी पक्षों से ऊपर है। स्वरूप और अवतार →
सोमनाथ
गुजरात के प्रभास पाटन में पहला ज्योतिर्लिंग, जहाँ चन्द्रमा दक्ष के शाप से मुक्त हुए। पावन भूगोल →
सोमवार
शिव का दिन। बहुत से भक्त सोमवार को व्रत रखते हैं, विशेषकर श्रावण के सोमवारों को। पर्व, व्रत और उपासना →
स्कन्द पुराण
सबसे बड़ा पुराण, तीर्थ-कथाओं से भरपूर; इसके केदार और काशी खंड हिमालयी धामों और वाराणसी का वर्णन करते हैं। पवित्र ग्रंथ और स्तोत्र →
स्वयम्भू
“स्वयं जन्मा।” वह लिंग जो प्राकृतिक रूप से प्रकट हुआ माना जाता है, मनुष्य के हाथों बना नहीं, जैसे केदारनाथ की शिला। प्रतिमा विज्ञान: शिव की प्रतिमा को पढ़ना →

ह

हर
“जो हर लें।” पापों और दुःखों को हरने वाले शिव का नाम; “हर हर महादेव” के जयघोष में गूँजता है। स्वरूप और अवतार →
हरतालिका तीज
भाद्रपद में स्त्रियों का व्रत, जो शिव को पति रूप में पाने के लिए पार्वती के तप की याद में रखा जाता है। पर्व, व्रत और उपासना →
हरिहर
वह प्रतिमा जिसमें विष्णु (हरि) और शिव (हर) एक ही देह में आधे-आधे हैं, जो उनकी एकता दिखाती है। स्वरूप और अवतार →

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